BBC हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, जियोपॉलिटिकल विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध से पहले ईरान को लेकर अमेरिका और इसराइल के बीच लगभग कोई मतभेद नहीं था. अब दोनों के रुख़ में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ दिखाई देने लगा है.
इस समाचार ने देशभर में हलचल मचा दी है। पिछले 24 घंटों में सोशल मीडिया पर इससे जुड़े ट्रेंड्स लगातार शीर्ष पर बने हुए हैं। राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
नीति निर्माताओं के एक वर्ग का मानना है कि इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेना अनिवार्य है। एक वरिष्ठ नेता ने संसद में कहा, 'जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरना हमारी प्राथमिकता है और हम इस दिशा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।'
इस घटनाक्रम का प्रभाव आने वाले समय में व्यापक होगा। आम जनता, नागरिक समाज और सरकारी तंत्र — सभी इसकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अगले 48 से 72 घंटे इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण होंगे।
यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर और अहम घटनाक्रम सामने आएंगे जो देश की दिशा तय करेंगे।