BBC हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल की जंग ख़त्म करने के लिए समझौता हो चुका है और आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि इसमें हज़ारों लोगों की मौत हुई है लेकिन इन आंकड़ों को लेकर भी सवाल हैं.
पिछले कुछ हफ्तों में इस विषय पर जनता के बीच गहरी उत्सुकता देखी जा रही थी। संसद और राज्य विधानसभाओं में भी इस पर बहस की मांग उठ चुकी है। देश के प्रमुख शहरों में इस ख़बर को लेकर जागरूकता तेज़ी से फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम आगामी महीनों में और महत्त्वपूर्ण हो जाएगा।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'इस मुद्दे पर उच्चतम स्तर पर विचार-विमर्श हो रहा है और शीघ्र ही ठोस निर्णय लिए जाएंगे।' सामाजिक कार्यकर्ता इसे 'जनहित का विषय' बताते हुए सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
विभिन्न सामाजिक और पेशेवर संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। ज़्यादातर की मांग है कि पारदर्शिता के साथ इसका समाधान निकाला जाए। मीडिया ने भी इसे प्राथमिकता के आधार पर कवर करना शुरू किया है।
यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर और अहम घटनाक्रम सामने आएंगे जो देश की दिशा तय करेंगे।