BBC हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि यूएई और क़तर ने हमले रोकने के लिए ईरान के साथ गोपनीय समझौते किए हैं. दोनों रिपोर्ट के प्रकाशित होने के तत्काल बाद क़तर और यूएई की प्रतिक्रिया आई है.
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाएं अपने चरम पर हैं। जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे के दीर्घकालिक प्रभाव देश की नीतियों पर पड़ सकते हैं। सरकारी तंत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग इस विषय पर पहले से नज़र रख रहे थे। नागरिक समाज संगठनों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।
नीति निर्माताओं के एक वर्ग का मानना है कि इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेना अनिवार्य है। एक वरिष्ठ नेता ने संसद में कहा, 'जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरना हमारी प्राथमिकता है और हम इस दिशा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।'
विभिन्न सामाजिक और पेशेवर संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। ज़्यादातर की मांग है कि पारदर्शिता के साथ इसका समाधान निकाला जाए। मीडिया ने भी इसे प्राथमिकता के आधार पर कवर करना शुरू किया है।
आने वाले दिनों में इस विषय पर और स्पष्टता आएगी। सरकार और सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है कि इस मुद्दे का समाधान जनहित में और समयबद्ध तरीके से हो।