नई दिल्ली। जब पश्चिमी देश मंदी की आशंका से जूझ रहे हैं, भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह वैश्विक सुस्ती के बावजूद रफ़्तार बनाए रखने में सक्षम है। वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि विनिर्माण क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 8.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते सरकारी खर्च और निजी निवेश में आई तेज़ी को इस विकास का श्रेय दिया जा रहा है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि महंगाई नियंत्रण में है और आने वाले महीनों में ब्याज दरों में नरमी की गुंजाइश है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति का प्रमाण है। उद्योग जगत में इसे लेकर सकारात्मक माहौल है। छोटे और मझोले उद्यमों पर भी इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय की नज़रें इस विकास पर टिकी हैं।
निवेशकों ने इस ख़बर का स्वागत किया है और नए निवेश के संकेत दिए हैं। रोज़गार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को इससे सबसे ज़्यादा फायदा मिलने की आशा है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस तरह के घटनाक्रम उस लक्ष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रमाण हैं।