नई दिल्ली। ऑटो उद्योग के जानकारों का कहना है कि भारत में ईवी क्रांति अब वापसी के रास्ते से गुज़र चुकी है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रही तेज़ वृद्धि और बैटरी की घटती कीमतें इस बदलाव को और गति दे रही हैं। टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि 2027 तक उनकी कंपनी का हर तीसरा वाहन इलेक्ट्रिक होगा। वहीं, विश्लेषक यह भी बताते हैं कि पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों ने ईवी को आर्थिक रूप से ज़्यादा आकर्षक बना दिया है।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह विकास भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक नई ऊंचाई पर स्थापित करेगा। इंजीनियरिंग और शोध संस्थानों में इस पर उत्साह है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी इससे नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। सरकार की 'डिजिटल इंडिया' पहल इस बदलाव को और गति दे रही है।
इस परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक ने बताया, 'यह सफलता भारत के तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है। हमारी टीम के युवा इंजीनियरों ने रात-दिन मेहनत की और आज उसका फल मिला।' केंद्रीय मंत्री ने इसे 'नए भारत का सूर्योदय' बताया।
इस तकनीकी विकास का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है जिससे आम जनजीवन बेहतर होगा। स्टार्टअप और एमएसएमई भी इससे लाभान्वित होने के मौके ढूंढ रहे हैं।
भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है और तकनीकी नवाचार इस सफर की रीढ़ है। यह उपलब्धि उस दिशा में एक ठोस कदम है।