नई दिल्ली। प्रगति मैदान का नवनिर्मित भारत मंडपम इस बार G20 का केंद्र होगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन में जलवायु वित्त पर एक ऐतिहासिक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर की उम्मीद है जिसमें विकासशील देशों को हरित ऊर्जा के लिए 100 अरब डॉलर सालाना देने का वादा शामिल हो सकता है। भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम' की थीम के तहत यह सम्मेलन आयोजित किया है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इस घटना को प्रमुखता से कवर किया है। वॉशिंगटन, लंदन और बीजिंग में इस पर टिप्पणियां आ रही हैं। वैश्विक व्यापार और कूटनीति पर इसके असर का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश अपने हितों की रक्षा के प्रति पूरी तरह सजग है।
वैश्विक स्तर पर इसका असर अभी आकलन में है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, कूटनीतिक संबंध और सांस्कृतिक संपर्क — तीनों पर नज़र रखी जा रही है। भारत सरकार ने कहा है कि देश के हित सर्वोपरि हैं।
भारत की कूटनीतिक परिपक्वता इस मुद्दे पर भी कसौटी पर होगी। दुनिया की नज़रें भारत पर टिकी हैं और नई दिल्ली इस चुनौती का सामना करने को तैयार है।