हैदराबाद। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग के परिसर में लॉन्च इवेंट के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 'शक्ति-2025' के स्विच-ऑन बटन को दबाया, तो मानो भारत के तकनीकी भविष्य का नया अध्याय शुरू हो गया। यह सुपरकंप्यूटर पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिज़ाइन किया गया है और इसके 80 प्रतिशत पुर्जे स्वदेशी हैं। आईआईटी और आईआईएससी के शोधार्थी इसका उपयोग कैंसर के इलाज में नई दवाएं खोजने के लिए करेंगे।
सायबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के मद्देनज़र विशेषज्ञों ने इस विकास का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया है। नई तकनीकें जहाँ संभावनाओं के नए द्वार खोलती हैं, वहीं चुनौतियां भी खड़ी करती हैं। सरकार और उद्योग मिलकर एक ऐसा ढाँचा तैयार करने में लगे हैं जो नवाचार को प्रोत्साहित करे और जोखिमों को कम करे।
इस तकनीकी विकास का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है जिससे आम जनजीवन बेहतर होगा। स्टार्टअप और एमएसएमई भी इससे लाभान्वित होने के मौके ढूंढ रहे हैं।
भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है और तकनीकी नवाचार इस सफर की रीढ़ है। यह उपलब्धि उस दिशा में एक ठोस कदम है।