श्रीहरिकोटा। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर सुबह 2 बजकर 37 मिनट पर हुए प्रक्षेपण ने एक बार फिर दुनिया को बता दिया कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा, 'यह उपग्रह 15 साल तक काम करेगा और इससे देश के तीन करोड़ से अधिक परिवारों को सस्ता इंटरनेट मिलेगा।' यह इसरो का इस वर्ष का तीसरा सफल प्रक्षेपण है। चंद्रयान-4 मिशन की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।
इस वैज्ञानिक उपलब्धि के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत और अथक शोध है। भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर रही है। सरकारी और निजी क्षेत्र से मिल रही फंडिंग ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। आने वाले दशक में भारत विश्व के अग्रणी विज्ञान राष्ट्रों में शुमार हो सकता है।
इस वैज्ञानिक खोज का सबसे बड़ा लाभार्थी आम आदमी होगा — चाहे वह बेहतर दवाओं के रूप में हो, सस्ती ऊर्जा के रूप में हो, या फिर अधिक उत्पादक कृषि के रूप में। भारत की वैज्ञानिक शक्ति का यह प्रदर्शन वैश्विक सहयोग के नए द्वार भी खोलेगा।
विज्ञान की यात्रा कभी नहीं रुकती। यह उपलब्धि अगले बड़े शोध की नींव है। भारत अपनी वैज्ञानिक क्षमता को और निखार कर 21वीं सदी के वैज्ञानिक नेतृत्व में अपनी जगह बनाने को तत्पर है।